Census 2027: भारत के बड़े शहरों में अपराध दर को लेकर अक्सर तुलना होती रहती है। कई बार रिपोर्ट्स में यह दिखाया जाता है कि किसी शहर में अपराध तेजी से बढ़ा है या किसी शहर में अपराध दर अचानक घट गई है। लेकिन इन आंकड़ों के पीछे का गणित समझना बेहद जरूरी है।
National Crime Records Bureau (NCRB) हर साल अपराध के मामलों का डेटा अपडेट करता है, लेकिन अपराध दर निकालने के लिए आबादी का आधार पिछली जनगणना का ही लिया जाता है। यही वजह है कि जनगणना के बाद अपराध दर में अचानक बदलाव देखने को मिलता है।
क्या है पूरा गणित?
अपराध दर का मतलब होता है— प्रति एक लाख आबादी पर दर्ज अपराध।
अगर अपराधों की संख्या बढ़ती या घटती है, लेकिन आबादी का आधार पुराना ही रहता है, तो अपराध दर की तस्वीर वास्तविकता से अलग दिख सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी शहर की असल आबादी बढ़ चुकी है लेकिन NCRB पुराने आंकड़ों का उपयोग कर रहा है, तो अपराध दर वास्तविक से ज्यादा दिखेगी।
दिल्ली का उदाहरण समझिए
दिल्ली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। NCRB की रिपोर्ट में आज भी दिल्ली शहर की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 1.6 करोड़ मानी जाती है।
जबकि मौजूदा अनुमान के अनुसार Delhi की आबादी 2.2 करोड़ से अधिक मानी जा रही है।
ऐसे में अगर अपराधों की संख्या समान रहे, तो पुरानी आबादी के आधार पर अपराध दर ज्यादा दिखाई देगी। यही वजह है कि दिल्ली राज्य और दिल्ली शहर के लिए समान अपराध संख्या होने के बावजूद दर में बड़ा अंतर दिखता है।
2011 में भी दिखा था यही असर
जब 2001 के बाद 2011 की जनगणना के आंकड़े लागू हुए, तब देश के कई शहरों की अपराध दर अचानक कम हो गई थी।
Kochi की अपराध दर 1,898 प्रति लाख से गिरकर 1,636 हो गई थी।
इसके अलावा Visakhapatnam, Bengaluru, Indore, Ahmedabad और Bhopal में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
बच्चों और बुजुर्गों के अपराध डेटा पर भी असर
यह समस्या केवल शहरों तक सीमित नहीं है। बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों की दर भी इसी तरह प्रभावित होती है।
NCRB बच्चों के अपराध डेटा के लिए 2011 की 18 साल से कम उम्र की आबादी का आधार लेता है, जबकि वर्तमान में यह संख्या बदल चुकी है।
इसी तरह बुजुर्गों की आबादी में तेज़ वृद्धि हुई है, लेकिन पुराने आंकड़ों के कारण उनके खिलाफ अपराध दर वास्तविकता से ज्यादा दिखाई दे सकती है।
2027 में क्या होगा?
अगर 2027 में नई जनगणना के आंकड़े लागू होते हैं, तो भारत के अधिकांश महानगरों की अपराध दर कागजों पर अचानक कम होती दिख सकती है।
लेकिन यह जरूरी नहीं कि अपराध वास्तव में कम हुए हों। यह केवल जनसंख्या आधार के अपडेट होने का प्रभाव होगा।
