Technology News: तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब इंटरनेट कनेक्टिविटी का भविष्य सीधे अंतरिक्ष से जुड़ता नजर आ रहा है। AST SpaceMobile ने अपने Block 1 BlueBird सैटेलाइट्स के जरिए एक सामान्य स्मार्टफोन पर 98.9Mbps की पीक डाउनलोड स्पीड हासिल कर बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। खास बात यह है कि इस टेस्ट के लिए फोन में किसी तरह का नया हार्डवेयर, डिश या विशेष डिवाइस इस्तेमाल नहीं किया गया।
बिना किसी अतिरिक्त डिवाइस के मिला हाई-स्पीड इंटरनेट
कंपनी के अनुसार यह टेस्ट बहामास के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में किया गया। इंटरनेट स्पीड सीधे एक सामान्य स्मार्टफोन पर भेजी गई, जिससे यह साबित हुआ कि भविष्य में बिना मोबाइल टावर के भी तेज इंटरनेट उपलब्ध कराया जा सकता है।
अब तक सैटेलाइट इंटरनेट के लिए अलग डिश या रिसीवर की जरूरत पड़ती थी, लेकिन AST SpaceMobile ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है जो आम मोबाइल फोन के साथ सीधे काम करेगी।
क्या है Block 1 BlueBird सैटेलाइट टेक्नोलॉजी?
कंपनी ने इस टेस्ट में अपने Block 1 BlueBird सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेट बैंडविड्थ जॉर्जिया स्थित हाइपर सर्वर से टेस्ट लोकेशन तक पहुंचाई गई। टेस्ट के दौरान स्पीड लगातार 97Mbps के आसपास रही और पीक डाउनलोड स्पीड 98.9Mbps तक पहुंच गई।
इसे सैटेलाइट-टू-स्मार्टफोन ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
क्यों खास है यह टेक्नोलॉजी?
अब तक सैटेलाइट कनेक्टिविटी को केवल इमरजेंसी मैसेजिंग या सीमित नेटवर्क कवरेज के रूप में देखा जाता था। लेकिन यह टेस्ट दिखाता है कि भविष्य में अंतरिक्ष से सीधे ब्रॉडबैंड जैसी हाई स्पीड इंटरनेट सेवा मिल सकती है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमर्शियल लॉन्च के बाद स्पीड कई चीजों पर निर्भर करेगी, जैसे यूजर्स की संख्या, नेटवर्क डिजाइन, स्पेक्ट्रम और रेगुलेटरी मंजूरी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह डेवलपमेंट?
भारत में इस तकनीक को लेकर उत्साह इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि AST SpaceMobile ने Vodafone Idea के साथ साझेदारी की है। इसका मकसद भारत में डायरेक्ट-टू-फोन सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की संभावनाओं को तलाशना है।
टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए नया मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड मोबाइल नेटवर्क का विकल्प नहीं बल्कि एक अतिरिक्त कवरेज लेयर बन सकता है। इससे ग्रामीण कनेक्टिविटी, समुद्री क्षेत्रों, आपदा प्रभावित इलाकों और रक्षा सेवाओं में इंटरनेट पहुंचाना आसान हो सकता है।
