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Vintage Cars: पुरानी गाड़ियों पर सख्ती! नई स्क्रैप पॉलिस�


Vintage Cars: अगर आप पुरानी या क्लासिक कारों के शौकीन हैं, तो केंद्र सरकार की नई व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी आपके लिए अहम साबित हो सकती है। सरकार ने सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए अनफिट वाहनों को स्क्रैप करना अनिवार्य किया है।

नई नीति के तहत तय उम्र पूरी कर चुकी गाड़ियों को फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। अगर वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल होता है, तो उसे स्क्रैप करना पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य सड़कों से ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले और असुरक्षित वाहनों को हटाना है।

15 और 20 साल पुराने वाहनों पर क्या नियम?

नई स्क्रैप पॉलिसी के मुताबिक, कमर्शियल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए उम्र सीमा पूरी होने के बाद फिटनेस टेस्ट जरूरी होगा।

अगर वाहन तकनीकी मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसका रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं होगा और उसे स्क्रैप करना पड़ेगा। हालांकि, सिर्फ वाहन की उम्र के आधार पर उसे सीधे स्क्रैप नहीं किया जाएगा।

विंटेज कारों को मिली राहत

सरकार ने 50 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को विंटेज कैटेगरी में रखा है। ऐसी गाड़ियों को कुछ शर्तों के साथ राहत मिल सकती है।

अगर वाहन अच्छी स्थिति में है, तो उसे स्क्रैप नहीं किया जाएगा। हालांकि, इन गाड़ियों का इस्तेमाल रोजमर्रा की यात्रा के बजाय शो, प्रदर्शनी या विशेष आयोजनों तक सीमित रखा जा सकता है।

20 से 45 साल पुरानी गाड़ियों पर सबसे ज्यादा असर

नई नीति का सबसे ज्यादा असर उन गाड़ियों पर पड़ सकता है जो 20 से 45 साल पुरानी हैं। ये वाहन न तो नई कैटेगरी में आते हैं और न ही विंटेज श्रेणी में।

ऐसे में इनके मालिकों को फिटनेस, रजिस्ट्रेशन और भविष्य के उपयोग को लेकर अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

फिटनेस टेस्ट पास होने पर मिलेगी राहत

एक बड़ी गलतफहमी यह है कि 15 साल पुरानी गाड़ी सीधे स्क्रैप हो जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है।

वाहन का फिटनेस टेस्ट पास होने पर उसका रजिस्ट्रेशन दोबारा कराया जा सकता है और वह सड़क पर चलती रह सकती है। इसके अलावा वाहन को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराने जैसे विकल्प भी मौजूद हैं।

दुनियाभर में लागू हैं ऐसे नियम

अमेरिका, यूरोप, जापान और चीन जैसे देशों में भी पुरानी गाड़ियों के लिए इसी तरह की नीतियां लागू हैं। इनका मकसद प्रदूषण कम करना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है।

भारत में भी यह नीति पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।



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