उत्तराखंड सरकार जून 2026 से प्रदेश के सभी मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। मदरसा बोर्ड के विकल्प के रूप में ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया जा रहा है, जो नए सिलेबस और संचालन नियमों की निगरानी करेगा।
देहरादून, 10 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों और मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए धामी सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। मदरसा बोर्ड को भंग किए जाने के बाद अब राज्य सरकार ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ के गठन को अंतिम रूप दे रही है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी मदरसों और अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, जिसकी प्रक्रिया जून महीने से शुरू होने जा रही है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का जोर
पिछले कुछ समय में राज्य के विभिन्न मदरसों में मानकों के उल्लंघन, छात्र संख्या में हेरफेर और सरकारी आर्थिक सहायता के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई थीं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन अनियमितताओं को रोकने के लिए ही नई नियमावली तैयार की गई है। सरकार का उद्देश्य इन संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
धार्मिक शिक्षा के साथ जुड़ेंगे आधुनिक विषय
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग वर्तमान में दो मुख्य बिंदुओं पर काम कर रहा है। पहला, धार्मिक शिक्षा का नया सिलेबस तैयार करना और दूसरा, पंजीकरण के कड़े नियम बनाना। नए सिलेबस की खास बात यह है कि इसमें केवल धार्मिक विषय ही नहीं होंगे, बल्कि उत्तराखंड के इतिहास, यहां की समृद्ध संस्कृति और विरासत को भी शामिल किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि इससे छात्र अपनी जड़ों और प्रदेश की पहचान से बेहतर ढंग से जुड़ पाएंगे।
मई अंत तक पूरी होगी तैयारी
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि धार्मिक शिक्षा के सिलेबस पर काम अंतिम चरण में है और मई के भीतर सभी नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। लक्ष्य यह है कि जून में पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर जुलाई से नए शैक्षणिक सत्र के साथ इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाए।
चुनौतियां और विरोध के स्वर
हालांकि, सरकार के इस कदम को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर चुनौतियां भी हैं। लंबे समय से पारंपरिक ढांचे में चल रहे कई मदरसों ने नई व्यवस्था और पंजीकरण की शर्तों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कुछ संस्थानों का मानना है कि इससे उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। विभाग इन आपत्तियों के समाधान के लिए संबंधित संगठनों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है, ताकि नियमों को व्यावहारिक बनाया जा सके।
नया ढांचा: क्या-क्या बदलेगा?
प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत ढांचा, छात्र संख्या का भौतिक सत्यापन और वित्तीय ऑडिट जैसे मामलों पर स्पष्ट नियम लागू होंगे। विभाग ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और मानकों को पूरा न करने वाले संस्थानों के संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।
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