Super El Nino May Trigger Extreme Heat In India: देश में गर्मी ने अभी से लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार साधारण एल नीन्यो नहीं, बल्कि ‘सुपर एल नीन्यो’ बनने का खतरा बढ़ रहा है। अगर ऐसा हुआ, तो गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं और कई राज्यों में भीषण लू का सामना करना पड़ सकता है।
क्या होता है एल नीन्यो
एल नीन्यो स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका मतलब ‘छोटा बच्चा’ होता है। इसका संबंध प्रशांत महासागर से है। सामान्य दिनों में समुद्र के ऊपर चलने वाली हवाएं गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं। इससे मौसम संतुलित रहता है। लेकिन जब एल नीन्यो आता है, तो ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसके कारण गर्म पानी वापस दक्षिण अमेरिका की ओर जाने लगता है। इससे समुद्र और हवा का तापमान बढ़ जाता है और दुनिया के मौसम पर असर पड़ता है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार प्रशांत महासागर का पानी बहुत तेजी से गर्म हो रहा है। मध्य प्रशांत क्षेत्र में तापमान पहले ही सामान्य से करीब 0.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो चुका है। समुद्र की सतह के नीचे भी गर्म पानी का बड़ा भंडार जमा है।
अगर तापमान 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाता है, तो इसे ‘सुपर एल नीन्यो’ कहा जाएगा। पिछले 70 सालों में ऐसा सिर्फ 1982, 1997 और 2015 में हुआ था। विशेषज्ञों को डर है कि इस बार यह पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर एल नीन्यो बन सकता है।
भारत पर क्या होगा असर
सुपर एल नीन्यो का सबसे बड़ा असर भारत के मौसम पर पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून कमजोर हो सकता है और बारिश कम होने की संभावना है। इसके चलते कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत में भीषण गर्मी पड़ सकती है। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हीटवेव यानी लू कई दिनों तक लगातार चल सकती है।
ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ा रही खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग पहले से ही धरती को गर्म कर रही है। ऐसे में अगर सुपर एल नीन्यो आता है, तो हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। समुद्र का बढ़ता तापमान और प्रदूषण मिलकर मौसम को और खतरनाक बना रहे हैं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहले जहां सामान्य एल नीन्यो का असर सीमित रहता था, अब ग्लोबल वार्मिंग के कारण उसका प्रभाव कई गुना बढ़ गया है।
पहले भी दिख चुका है असर
2015 में आए सुपर एल नीन्यो के दौरान भारत में मानसून कमजोर रहा था और कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन गए थे। वहीं 1997 में दुनिया के कई हिस्सों में बाढ़, जंगलों में आग और भयंकर सूखा देखने को मिला था। इस बार वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए ज्यादा है, क्योंकि समुद्र पहले की तुलना में कहीं तेजी से गर्म हो रहा है।
लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होगी। तेज धूप और लू से बचाव के लिए पानी ज्यादा पीना, दोपहर में बाहर निकलने से बचना और शरीर को ठंडा रखना जरूरी होगा।
