India-UAE Oil Reserve Deal: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिली बड़ी मजब

India-UAE Oil Reserve Deal: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिली बड़ी मजब


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई पर मंडरा रहे खतरे के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की UAE यात्रा के दौरान भारत और United Arab Emirates के बीच कई अहम समझौते हुए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण समझौता रणनीतिक कच्चे तेल भंडार को बढ़ाने को लेकर हुआ है।

इस नई डील के बाद भारत का Strategic Petroleum Reserve यानी आपातकालीन कच्चा तेल भंडार करीब 70 फीसदी तक बढ़ सकता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव के कारण तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है।

क्या है पूरी डील

UAE की सरकारी तेल कंपनी Abu Dhabi National Oil Company ने भारत में अपने तेल स्टोरेज को बढ़ाने पर सहमति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक ADNOC अब भारत में करीब 30 मिलियन बैरल तक तेल स्टोर करेगी। अभी UAE के पास मंगलुरु में लगभग 60 लाख बैरल तेल रखने की सुविधा है, जिसे उसने लीज पर लिया हुआ है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद भारत के रणनीतिक तेल भंडार में 40 लाख टन से ज्यादा अतिरिक्त तेल जुड़ सकता है। फिलहाल भारत के पास विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पाडुर में करीब 38 मिलियन बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता मौजूद है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह कदम

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अगर युद्ध, समुद्री रास्ते बंद होने या तेल सप्लाई रुकने जैसी स्थिति बनती है, तो देश पर बड़ा असर पड़ सकता है। हाल के दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव और Hormuz Strait में बढ़ते खतरे ने चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे हालात में रणनीतिक तेल भंडार देश के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। जरूरत पड़ने पर सरकार कुछ समय तक इसी तेल का इस्तेमाल कर सकती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास मौजूद रणनीतिक तेल भंडार देश की जरूरतों को पूरी क्षमता पर सिर्फ करीब 9.5 दिन तक ही पूरा कर सकता है। ऐसे में यह नई डील भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है।

गैस सप्लाई में भी मिलेगा फायदा

भारत और UAE के बीच सिर्फ तेल स्टोरेज ही नहीं, बल्कि LPG और LNG सप्लाई को लेकर भी समझौते हुए हैं। ADNOC और Indian Oil Corporation के बीच घरेलू गैस सप्लाई बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे देश में गैस की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। इसके अलावा UAE के फुजैराह इलाके में भी भारत के लिए तेल स्टोरेज की संभावना पर काम किया जाएगा। इससे भारत की Hormuz Strait पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।

विशेषज्ञ क्यों मान रहे बड़ी उपलब्धि

ऊर्जा विशेषज्ञ इस समझौते को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। दुनिया के कई बड़े देशों जैसे अमेरिका, चीन और जापान के पास पहले से बड़े रणनीतिक तेल भंडार हैं। भारत भी अब तेजी से अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बड़ा तेल भंडार होने से संकट के समय भारत को महंगा तेल खरीदने की मजबूरी कम होगी और देश में सप्लाई भी बनी रहेगी। यही वजह है कि इस डील को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है।



Leave a Reply