Maternal Mortality Rate, U P में अब भी प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु द�

Maternal Mortality Rate, U P में अब भी प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु द�


Uttar Pradesh Maternal Mortality Rate: मां अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए हर मुश्किल का सामना करती है, लेकिन दुख की बात यह है कि बच्चे को जन्म देते समय आज भी कई महिलाओं की जान खतरे में पड़ जाती है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और सरकारी कोशिशों के बावजूद प्रसव के दौरान होने वाली मौतों का सिलसिला पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। हालांकि पहले के मुकाबले इसमें कमी जरूर आई है।

उत्तर प्रदेश में पिछले 15 सालों के दौरान मातृ मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां प्रति एक लाख प्रसव पर 258 महिलाओं की मौत होती थी, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 167 तक पहुंच गया है। इसके बावजूद यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर मातृ मृत्यु दर का औसत 88 है। यानी उत्तर प्रदेश में अब भी राष्ट्रीय औसत के मुकाबले लगभग दोगुनी महिलाएं प्रसव के दौरान अपनी जान गंवा रही हैं।

मुरादाबाद में स्थिति बेहतर, लेकिन चुनौती अब भी बाकी

मुरादाबाद में मातृ मृत्यु दर प्रदेश के औसत से कम बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यहां यह आंकड़ा 80 से थोड़ा ज्यादा और 90 से कम रहने का अनुमान है। इस हिसाब से मुरादाबाद की स्थिति प्रदेश के दूसरे जिलों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसी वजह से मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिली है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।

समय पर जांच से कम हो सकता है खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि अगर महिलाएं गर्भधारण के बाद से ही नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच कराएं, तो प्रसव के दौरान होने वाली कई जटिलताओं से बचा जा सकता है। गर्भावस्था के समय शरीर में कई बदलाव होते हैं। कई बार ब्लड प्रेशर, खून की कमी, संक्रमण या दूसरी गंभीर समस्याएं सामने आ जाती हैं। अगर इनका समय पर इलाज न हो, तो मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच से बीमारी या जटिलता का समय रहते पता चल जाता है और इलाज शुरू किया जा सकता है। इसी कारण डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर अस्पताल जाकर जांच कराने की सलाह देते हैं।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच की सुविधा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक रघुवीर सिंह ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच की जा रही है। महिलाओं को प्रसव से पहले जरूरी जांच, दवाइयां और स्वास्थ्य संबंधी सलाह मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अगर हर महिला गर्भावस्था के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखे और समय पर जांच कराए, तो मातृ मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सुरक्षित मातृत्व के लिए सिर्फ अस्पतालों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की जागरूकता भी बेहद जरूरी है।



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