PM Narendra Modi ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों से कई व्यवहारिक बदलाव अपनाने की अपील की है। उन्होंने खासतौर पर सोने की खरीद कम करने, कार पूलिंग बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्प अपनाने पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि अगर देश आयात पर निर्भर कुछ प्रमुख खर्चों में थोड़ी भी कटौती करता है, तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाला दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आयात खर्च कम होने से होगी बड़ी राहत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि कच्चे तेल के आयात में 10 प्रतिशत तक कमी आती है, तो देश को करीब 13.5 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। इसी तरह सोने की खरीद में 10 प्रतिशत की कमी से लगभग 7.2 अरब डॉलर बचाए जा सकते हैं। वनस्पति तेल के आयात में कटौती से करीब 1.95 अरब डॉलर की राहत मिलने का अनुमान है।
विदेशी यात्राओं पर खर्च रोकने की भी सलाह
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश यात्रा और उससे जुड़े खर्च भी विदेशी मुद्रा पर बड़ा असर डालते हैं। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर साल बड़ी मात्रा में पैसा विदेशों में यात्रा, छुट्टियों और शॉपिंग पर खर्च होता है। यदि गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं पर कुछ समय के लिए रोक लगाई जाए, तो करीब 15.8 अरब डॉलर तक की बचत हो सकती है।
रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ रहा दबाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 690.7 अरब डॉलर रहा। हालांकि, रुपये में लगातार उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने दबाव बढ़ाया है।
ऐसे में सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आयात बिल घटता है और विदेशी मुद्रा का अनावश्यक बहाव कम होता है, तो इससे रुपये को भी स्थिरता मिल सकती है। वर्क फ्रॉम होम, कार पूलिंग और स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल जैसे छोटे बदलाव भी लंबे समय में बड़ा आर्थिक असर डाल सकते हैं।
छोटे बदलाव से मजबूत हो सकती है अर्थव्यवस्था
सरकार का मानना है कि यदि देश के लोग उपभोग में थोड़ा संयम दिखाएं और गैर-जरूरी आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम करें, तो भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। यही कारण है कि 45 अरब डॉलर की संभावित बचत को केवल एक अनुमान नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता की दिशा में बड़ा अवसर माना जा रहा है।
