उत्तराखंड एसटीएफ ने ‘ऑपरेशन फेक पिल’ के तहत 24 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटद्वार में नकली दवा बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री को सील किया है। यह गिरोह फेसबुक के जरिए नामी कंपनियों की नकली जीवनरक्षक दवाइयां आधे दाम पर बेचकर कई राज्यों में सप्लाई कर रहा था।
देहरादून, 24 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। अगर आप इंटरनेट के जरिए नामी कंपनियों की जीवनरक्षक दवाइयां सस्ते दामों पर मंगा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। उत्तराखंड एसटीएफ ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नकली दवाओं (fake medicine racket) का जाल बिछाने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। ‘ऑपरेशन फेक पिल’ के तहत पिछले 24 घंटे के भीतर एसटीएफ की यह दूसरी बड़ी स्ट्राइक है, जिसमें कोटद्वार स्थित एक अवैध दवा फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।
जांच में साफ हुआ है कि यह संगठित गिरोह बेहद चालाकी से कई राज्यों में मौत का यह कारोबार चला रहा था।
बंद फैक्ट्री में चल रहा था उत्पादन
एसटीएफ को कोटद्वार के सिडकुल सिगड्डी क्षेत्र में एक बंद फैक्ट्री के भीतर संदिग्ध गतिविधियों का इनपुट मिला था। सूचना पुख्ता होने के बाद एसटीएफ, ड्रग विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम ने मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स परिसर में संयुक्त छापेमारी की।
अधिकारियों के अनुसार, इस फैक्ट्री का लाइसेंस वर्ष 2024 में ही निरस्त किया जा चुका था। इसके बावजूद अंदर टैबलेट बनाने वाली मशीनें और कच्चा माल मौजूद था। टीम ने मौके से करीब तीन किलो कंप्रेस्ड टैबलेट और 34 पंच उपकरण बरामद किए हैं।
विवादों से रहा है पुराना नाता
जिस फैक्ट्री पर यह कार्रवाई हुई है, उसका आपराधिक इतिहास रहा है। वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान इसी यूनिट पर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद 2024 में तेलंगाना पुलिस ने भी यहां छापा मारकर नकली दवाइयों की बड़ी खेप पकड़ी थी। लगातार कार्रवाइयों के बाद भी यहां गुपचुप तरीके से अवैध काम जारी था।
फेसबुक पेज से जुड़ते थे तार
इस पूरे रैकेट की जड़ें ‘एसके हेल्थ केयर’ नाम के एक फेसबुक पेज से जुड़ी मिलीं। इस पेज पर सनफार्मा, जायडस, ग्लेनमार्क और मैनकाइंड जैसी नामी कंपनियों की दवाइयां बाजार से आधी कीमत पर बेची जा रही थीं।
शक होने पर एसटीएफ ने खुद डमी ग्राहक बनकर ऑर्डर प्लेस किया। डिलीवरी मिलने पर जब उन दवाओं की जांच की गई, तो वे पूरी तरह नकली निकलीं। इनकी पैकेजिंग, होलोग्राम और एमआरपी इतनी सटीक थी कि मेडिकल स्टोर संचालक भी आसानी से धोखा खा जाएं। गिरोह कूरियर के जरिए उत्तराखंड से लेकर यूपी, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और बिहार तक सप्लाई कर रहा था।
आरोपियों ने उगले अहम राज
इस मामले में पुलिस ने गौरव त्यागी और जतिन सैनी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में गौरव त्यागी ने एसटीएफ को बताया कि इससे पहले रुड़की में भी उसकी एक फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी है।
आरोपियों का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वे किसी एक जगह टिकने के बजाय, जरूरत पड़ने पर बंद पड़ी फैक्ट्रियों को कुछ समय के लिए खोलते थे और स्टॉक तैयार होने के बाद उन्हें फिर से बंद कर देते थे। यह सारा काम बिना किसी मेडिकल मानक या सुरक्षा उपकरणों के, बेहद अस्वच्छ हालात में किया जा रहा था।
स्थानीय दवा विक्रेताओं पर भी नजर
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने इस पूरे नेटवर्क को ‘साइलेंट किलर’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सस्ते के लालच में कुछ स्थानीय दवा विक्रेताओं की भूमिका भी संदिग्ध है, जो बिना सत्यापन के यह माल खरीद रहे थे।
देहरादून के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध, धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसियां अब गिरोह की सप्लाई चेन और आर्थिक लेनदेन खंगाल रही हैं।
पब्लिक एडवाइजरी
- हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें।
- दवा खरीदते समय पक्का बिल जरूर मांगें।
- ऑनलाइन असामान्य रूप से सस्ती मिल रही दवाओं से सतर्क रहें।
- पैकेजिंग पर बैच नंबर और एक्सपायरी डेट को ध्यान से चेक करें।
- किसी भी संदिग्ध मेडिकल स्टोर या सप्लायर की सूचना तुरंत पुलिस या ड्रग विभाग को दें।
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