UP Panchayat Election 2026:उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार इस फैसले के जरिए पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। यह नया आयोग पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की स्थिति तय करेगा। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव की अगली प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
मई में चुनाव होना मुश्किल
हालांकि सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है, लेकिन अब 26 मई तक पंचायत चुनाव होना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है। कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में अभी काफी समय लगना बाकी है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव अब बारिश के बाद अक्टूबर-नवंबर में कराए जा सकते हैं। अगर उस समय भी स्थिति नहीं बनी, तो फिर अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद ही वोटिंग हो सकती है।
सभी जिलों में जाएगा आयोग
सरकार जिस नए ओबीसी आयोग का गठन करने जा रही है, वह उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में जाकर सर्वे करेगा। आयोग जातिवार और आर्थिक आंकड़ों की जांच करेगा। इसके बाद आरक्षण को लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। जानकारों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम 4 से 5 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद आयोग की सिफारिशों पर राजनीतिक दलों और आम लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। उन आपत्तियों के निपटारे में भी करीब एक महीना लग सकता है।
बारिश और खेती भी बड़ी वजह
जून के बाद उत्तर प्रदेश में मॉनसून शुरू हो जाता है। गांवों में धान और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई का काम तेजी पकड़ लेता है। ऐसे समय में पंचायत चुनाव कराना प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। सरकार के पास अक्टूबर-नवंबर का विकल्प जरूर है, लेकिन उसके कुछ महीने बाद ही विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव से गांवों में राजनीतिक तनाव और गुटबाजी बढ़ सकती है, जिसका असर बड़े चुनावों पर भी पड़ सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी तेजी
पंचायत चुनाव का मामला लंबे समय से अटका हुआ था। इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को जल्द ओबीसी आयोग बनाने का निर्देश दिया था। कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया था कि पंचायत चुनाव लगातार टाले जा रहे हैं और ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासकों को जिम्मेदारी देना संविधान की भावना के खिलाफ है। इसके बाद सरकार ने इस मामले में तेजी दिखाई।
वोटर लिस्ट भी अभी तैयार नहीं
चुनाव में देरी की एक बड़ी वजह वोटर लिस्ट भी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने अंतिम मतदाता सूची तैयार करने की तारीख 10 जून तय की है। हालांकि आपत्तियों और सुधार की प्रक्रिया में और समय लग सकता है। इस बार कई गांव शहरों की सीमा में शामिल हो चुके हैं। इसकी वजह से ग्राम पंचायतों की संख्या में भी बदलाव संभव माना जा रहा है।
यूपी में पंचायतों का बड़ा नेटवर्क
उत्तर प्रदेश में पंचायत व्यवस्था काफी बड़ी है। राज्य में इस समय करीब 57,695 ग्राम पंचायतें हैं। इसके अलावा 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें मौजूद हैं। आने वाले पंचायत चुनाव में इन्हीं पंचायतों के प्रतिनिधियों का चुनाव होना है।
