Fuel Saving Campaign: पीएम मोदी की अपील का असर, यूपी के अधिकारी

Fuel Saving Campaign: पीएम मोदी की अपील का असर, यूपी के अधिकारी


Fuel Saving Campaign: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेट्रोलियम उत्पादों की बचत और प्रदूषण कम करने की अपील की थी। उनकी इस अपील का असर अब उत्तर प्रदेश में साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को कई वरिष्ठ अधिकारी साइकिल और पैदल चलकर अपने दफ्तर पहुंचे। इस पहल का मकसद सिर्फ ईंधन बचाना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करना भी है।

एसजीपीजीआई निदेशक साइकिल से पहुंचे संस्थान

लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एसजीपीजीआई के निदेशक राधा कृष्ण धीमान अपने आवास से साइकिल चलाकर संस्थान पहुंचे। उन्होंने कहा कि संस्थान में अब “साइकिल कल्चर” को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत डॉक्टरों, कर्मचारियों, छात्रों और अन्य लोगों को छोटी दूरी के लिए वाहन का कम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

धीमान ने बताया कि संस्थान परिसर में अलग-अलग जगहों पर साइकिल स्टैंड भी बनाए जाएंगे। उनका मानना है कि इससे पेट्रोल और डीजल की बचत होगी, प्रदूषण कम होगा और लोगों की फिटनेस भी बेहतर होगी।

बाराबंकी डीएम ने भी दिया संदेश

बाराबंकी के जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने भी सादगी की मिसाल पेश की। वह अतिरिक्त जिलाधिकारी निरंकार सिंह के साथ पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिलाधिकारी ने अधिकारियों और आम लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, पैदल चलने को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि इससे ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

योगी सरकार चला रही मितव्ययिता अभियान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ईंधन बचाने और सरकारी खर्च कम करने को लेकर लगातार कदम उठा रहे हैं। बीते मंगलवार को उन्होंने राज्यभर में सरकारी काफिलों में तुरंत 50 प्रतिशत कटौती करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा सरकार ने सार्वजनिक परिवहन, वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि वाहनों पर निर्भरता कम करने से न सिर्फ पेट्रोलियम उत्पाद बचेंगे, बल्कि प्रदूषण भी कम होगा।

फिटनेस और पर्यावरण दोनों पर फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि साइकिल चलाना और पैदल चलना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे शरीर फिट रहता है और कई बीमारियों का खतरा भी कम होता है।
साथ ही, अगर लोग छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करें, तो शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकती है।

लोगों को मिल रहा सकारात्मक संदेश

अधिकारियों की इस पहल को लोग सकारात्मक नजरिए से देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब बड़े अधिकारी खुद उदाहरण पेश करेंगे, तो आम जनता भी इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित होगी। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे छोटे-छोटे प्रयास भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।



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