उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में न्यायिक जांच कराने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
देहरादून, 14 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल ने नीट (NEET) मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखे एक औपचारिक पत्र में गोदियाल ने कहा कि देश में बार-बार होने वाले पेपर लीक युवाओं के भविष्य और उनकी मेहनत पर ‘कुठाराघात’ हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं में सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों की संलिप्तता ने पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को संदिग्ध बना दिया है।
कांग्रेस के प्रदेश मीडिया चेयरमैन राजीव महर्षि द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, गोदियाल ने पत्र में रेखांकित किया है कि नीट जैसी देश की सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में भ्रष्टाचार के मामलों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी का विषय नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर चुनौती है।
परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल
गणेश गोदियाल ने अपने पत्र में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) और नीट परीक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली धांधली एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। उन्होंने चिंता जताई कि हर साल सख्ती और जांच के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं दिख रहा है। जब परीक्षाओं की गोपनीयता ही सुरक्षित नहीं रहेगी, तो प्रतिभाशाली और ईमानदार छात्रों का मनोबल गिरना निश्चित है।
केंद्र सरकार से की गई प्रमुख मांगें
कांग्रेस नेता ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके:
- न्यायिक जांच: नीट परीक्षा में हुई सभी अनियमितताओं की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो।
- कठोर दंड: परीक्षा संचालन में शामिल दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और संगठित गिरोहों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- आधुनिक निगरानी: परीक्षा केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसे तकनीकी इंतजाम अनिवार्य किए जाएं।
- पुनः परीक्षा: यदि जांच में बड़े पैमाने पर धांधली की पुष्टि होती है, तो प्रभावित अभ्यर्थियों के हित में फिर से परीक्षा आयोजित की जाए।
- सख्त कानून: पेपर लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कठोर और प्रभावी कानून बनाया जाए।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर छात्रों के साथ खड़ी है। गोदियाल ने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार भविष्य की परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित करेगी, ताकि युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
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